मै ही
साम्प्रदायिकता हूँ
छल-प्रपंचो से रची
गई
झूठे आडम्बरों से
ढकी गई
कपट के आँचल में
ही पली
विष का ही जय गान
किया
क्योंकि ...... मै ही
साम्प्रदायिकता हूँ !
दोषी का ही गुण-गान किया
आरोपी को ही
सम्मान दिया
निश्चल-निर्मल धाराओं का
सदा ही यूँ अपमान
किया
क्योंकि ...... मै ही
साम्प्रदायिकता हूँ !
राजनीति का रूप
बदलकर
कुनीति का जयगान
किया
सत्ता के
गलियारों में भी
नंगो जैसा नाच
किया
क्योंकि ...... मै ही
साम्प्रदायिकता हूँ !
निर्दोषों का
रक्त बहा कर
मानवता का अपमान
किया
पाखंडों के साए
में हरदम
धर्म का ही अपमान
किया
क्योंकि ...... मै ही
साम्प्रदायिकता हूँ !
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