इस दुनिया में अच्छाई के साथ बुराई भी है , लेकिन अगर हम
सिर्फ अच्छाई की चर्चा करें वही बेहतर होगा ,क्योंकि बुराई तो
चाहती ही है की सिर्फ उसकी बात हो , हमें उसको
नज़रंदाज़ करके अच्छे को तरजीह देना चाहिए .............. ! negative हमारे आस पास इतना ज्यादा है की उससे पूरी तरह
बच पाना असंभव है , इसलिए जब हम सिर्फ पॉजिटिव पर ध्यान केन्द्रित
करेंगे तभी कुछ बचाव हो पायेगा ! लेकिन जब हम अपनी तरफ से ही negative के लिए जगह छोड़
देंगे तो फिर .............. !

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