देश की सत्ता पर 2014 में कौन
काबिज होगा, राजनीतिक पर्यवेक्षक इसके कयास लगा रहे हैं । परन्तु
लड़ाई दिलचस्प मोड़ पर है ,इससे इनकार नहीं किया जा सकता । दिल्ली में आप के नये राजनीतिक
प्रयोगों की ऐतिहासिक कामयाबी और
उसके बाद नाटकीय ढंग से , सत्ता से विदाई के बाद नजरें इस बात पर भी हैं कि
2014 में भारतीय राजनीति जाति-धर्म, परिवारवाद, क्षेत्रवाद
आदि से जुड़े पारंपरिक चुनावी समीकरणों में ही उलझी रहेगी या भ्रष्टाचार, महंगाई, गरीबी
और बेरोजगारी जैसे आम आदमी से जुड़े मुद्दे चुनावी राजनीति में बड़ी भूमिका
निभायेंगे । इतना तय है कि 2014 के आम
चुनाव को महंगाई, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, संप्रदायवाद
आदि मुख्य मुद्दे प्रभावित करेंगे, क्योंकि
इन मुद्दों को हल करने का तरीका कोई नहीं बता रहा है । देश की सत्ताधारी पार्टी और
मुख्य विपक्षी पार्टी सिर्फ पीएम कंडीडेट कौन होगा इस पर बहस कर रही हैं!
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