सच की तलाश में शुरू हुआ सफ़र.....मंजिल तक पहुंचेगा जरुर !!!
AMIR KHURSHEED MALIK
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Tuesday, March 8, 2016
Tuesday, August 4, 2015
बयानबाजियों में उलझती राजनीति
आज राजनीति कर्म से आगे बढ़ कर सिर्फ बयानबाजियों में उलझती
नज़र आ रही है । अलग-अलग मुद्दों पर अलग-अलग पक्षों की
बयानबाजियाँ और राजनीतिक दलों की खींचतान के साथ ही माहौल में गर्माहट पैदा हो जाती
है। शायद बयान देने वालों का मकसद भी यही हालात पैदा करना होता है । अक्सर ही ऐसे बेतुके
बयान सामने आ जाते हैं । हालांकि ऐसे बयानों से सम्बंधित दल फ़ौरन ही किनारा कर लेता
है । परन्तु मीडिया में चर्चा पा चूका बयान अपने उद्देश्य को पूरा कने में जुट
जाता है । किसी भी महानुभाव को संवैधानिक दायरे में ही सार्वजनिक
बातचीत को रखना चाहिए। यकीनन यह हालात बदलने चाहिए ।
देश के संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को संविधान के दायरे में ही हल ढूंढना चाहिए ।
असंवैधानिक भाषा और असंसदीय आचरण से देश जुड़ता नहीं , बिखरता है । लोगों में
उन्माद भरने से मसले सुलझते नहीं , उलझते हैं ।
Saturday, July 4, 2015
आतंकवाद - एक बड़ी समस्या
विश्व के सामने
आतंकवाद एक बड़ी समस्या बन कर आ खड़ा हुआ है । विश्व अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा आतंकवाद
को फैलाने और रोकने के नाम पर खर्च होता है । अनगिनत निर्दोषों की हत्या और बहुमूल्य संपत्ति का नुकसान मात्र राजनितिक
बयानबाजियों के बाद भुला दिया जाता है । दावे अनगिनत किये जाते हैं, पर वास्तविकता यही है की असल समस्या दिन ब दिन विकराल रूप धारण करके हमारे
सामने मौजूद है । इससे निज़ात पाने का न तो अब तक आत्मबल जुटा पाये हैं, और न ही पूरी शक्ति से इस कुचक्र को कुचलने को कोई रणनीति ही बना पाये हैं।
प्रत्येक आतंकी घटना की पुनरावृति के बाद हमारे शासक उन्हीं घिसे-पिटे शब्दबाणों से प्रहार करते हैं, जैसे यह भी रस्म
अदायगी का एक आवश्यक उपक्रम भर रह गया है। जिस अमेरिका ने कभी मजहबी आतंकवाद को रूस के
खिलाफ इस्तेमाल किया और इसे संरक्षण भी दिया था। वो खुद उसी आतंकवाद का शिकार हुआ।
मजहब आधारित आतंकवाद के खिलाफ अभियान में अमेरिका को खरबों डॉलर झोंकना पड़ा।
ओसामा बिन लादेन का सफाया करने में सफलता जरूर मिली, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ खरबों डॉलर झोंकने से
एक खतरनाक स्थिति यह पैदा हुई , कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था लड़खड़ा गई। आज इस अमेरिकी
गलती को आज सारा विश्व भुगत रहा है । भारत के लिए यह मामला कुछ ज्यादा ही
महत्वपूर्ण हो जाता है । भारत से लगे देशों में आतंकवाद की फसल दिन दुनी – रात
चौगुनी तरक्की कर रही है । सूचनाओ को इकठ्ठा करने की लम्बी चौड़ी कवायद के बाद भी
हम हादसों को रोक नही पा रहे हैं ।
Friday, July 3, 2015
Wednesday, July 1, 2015
Friday, June 26, 2015
बस यूँ ही चलते-चलते ......
बस यूँ ही चलते-चलते ......
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किसी के पास इतना पैसा है कि उसको कहाँ रखे ,
इस मुसीबत का सामना कर रहा है !
और यह कमबख्त स्विस बैंक.......
किसी न किसी नाम का खुलासा हो ही जाता है !
पर ....
किसी के पास इस वक़्त खाने के बाद ,
शाम के पेट भरने का इंतज़ाम भी नहीं है !
अरे कुछ नहीं ........... ,
बस यूँ ही चलते-चलते ..................ख्याल आ गया !
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किसी के पास इतना पैसा है कि उसको कहाँ रखे ,
इस मुसीबत का सामना कर रहा है !
और यह कमबख्त स्विस बैंक.......
किसी न किसी नाम का खुलासा हो ही जाता है !
पर ....
किसी के पास इस वक़्त खाने के बाद ,
शाम के पेट भरने का इंतज़ाम भी नहीं है !
अरे कुछ नहीं ........... ,
बस यूँ ही चलते-चलते ..................ख्याल आ गया !
चलते-चलते
बस यूँ ही , चलते-चलते ......
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सोशल मीडिया पर जितनी आदर्शवादिता की सीख मै खुद पोस्ट करता हूँ ,
अगर उसकी आधी भी मै खुद अमल में ले आता ,
तो ......... अब तक “मैं” ,
“मैं” से निकल कर “आदमी” बन गया होता ! ! !
अरे अरे ..... आप नाराज़ मत होइए ,
यह मेरा निशाना 100% खुद पर ही है !
हम्म ...... बोले तो ..... ‘आत्मविश्लेषण’
बस यूँ ही चलते-चलते ..................ख्याल आ गया !
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सोशल मीडिया पर जितनी आदर्शवादिता की सीख मै खुद पोस्ट करता हूँ ,
अगर उसकी आधी भी मै खुद अमल में ले आता ,
तो ......... अब तक “मैं” ,
“मैं” से निकल कर “आदमी” बन गया होता ! ! !
अरे अरे ..... आप नाराज़ मत होइए ,
यह मेरा निशाना 100% खुद पर ही है !
हम्म ...... बोले तो ..... ‘आत्मविश्लेषण’
बस यूँ ही चलते-चलते ..................ख्याल आ गया !
Saturday, April 4, 2015
उर्दू कहानी के सशक्त हस्ताक्षर : खुर्शीद मलिक
आज उनको हमसे बिछड़े हुए 12 साल हो गए । यकीनन वक़्त हर जख्म पर मरहम रख देता है । पर कुछ कमियां कभी पूरी नहीं हो सकती । 04 अप्रैल 2003 को हमारे वालिद और उर्दू अफसानानिगार जनाब “खुर्शीद अहमद मलिक” हम सब को अकेला छोड़ कर दुनिया को अलविदा कह गए थे । इस्लामियां इंटर कॉलेज में अंग्रेजी के प्रवक्ता के पद पर कार्यरत रहते हुए भी उर्दू अदब से उनका लगाव बेमिसाल था । उनके अनगिनत उर्दू अफ़साने देश-विदेश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए । उनके कहानी संग्रह “सिमटी हुई किरचें” और “रिश्तों का बोझ” को काफी पसंद किया गया था । इनको कई पुरस्कार भी प्राप्त हुए थे । इसके अलावा उनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हुईं ।“जहान –ए-अफसाना” सहित कई कहानी संग्रहों का उन्होंने सम्पादन किया । रूसी कहानियों के उर्दू में अनुवाद के लिए उन्हें काफी प्रशंसा मिली । प्रसिद्ध उर्दू लेखक “रामलाल” के साहित्यिक पत्रों पर विशिष्ठ लेखन के लिए उर्दू साहित्य जगत में उन्हें काफी सराहा गया । इसको एक पुस्तक के रूप में भारत के साथ पाकिस्तान में भी प्रकाशित होने का मौका मिला । कई बड़े अंग्रेजी के लेखकों की रचनाओं को उर्दू और हिंदी के पाठकों तक पहुचाने के लिए उनका अनुवाद का काम पूरे जीवन चलता रहा ।बेडमिन्टन के अच्छे खिलाड़ी मोहतरम “खुर्शीद अहमद मलिक” साहब के वालिद “आस मोहम्मद मलिक” इस्लामियां इंटर कॉलेज में प्रिंसिपल थे । अंग्रेजी के अध्यापक,उर्दू और हिंदी के लेखक “खुर्शीद अहमद मलिक” साहब ने हाई स्कूल के लिए गणित विषय की पाठ्य पुस्तक भी लिखी थी । जिसको उस समय कई विद्यालयों में काफी सराहना भी मिली थी । “खुर्शीद अहमद मलिक” साहब की पत्नी “शमा अज़ीज़” नेशनल गर्ल्स इंटर कॉलेज में होम साइंस की लेक्चरार रही हैं । “खुर्शीद अहमद मलिक” के कई कहानी संग्रहों के आवरण पृष्ठ के चित्र उनकी ही कला का नमूना होते थे । उनकी दो बहने डा. सुरैय्या मलिक और डा. शहनाज़ मलिक हैं । जो कानपुर में रहती हैं ।तीन बेटे:-ई० आमिर मलिक,डा.कादिर मलिक,डा.यासिर मलिक हैं ।
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