सच की तलाश में शुरू हुआ सफ़र.....मंजिल तक पहुंचेगा जरुर !!!

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AMIR KHURSHEED MALIK
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Saturday, July 4, 2015

आतंकवाद - एक बड़ी समस्या

विश्व के सामने आतंकवाद एक बड़ी समस्या बन कर आ खड़ा हुआ है । विश्व अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा आतंकवाद को फैलाने और रोकने के नाम पर खर्च होता है । अनगिनत निर्दोषों की हत्या और बहुमूल्य संपत्ति का नुकसान मात्र राजनितिक बयानबाजियों के बाद भुला दिया जाता है । दावे अनगिनत किये जाते हैं, पर वास्तविकता यही है की असल समस्या दिन ब दिन विकराल रूप धारण करके हमारे सामने मौजूद है । इससे निज़ात पाने का न तो अब तक आत्मबल जुटा पाये हैं, और न ही पूरी शक्ति से इस कुचक्र को कुचलने को कोई रणनीति ही बना पाये हैं। प्रत्येक आतंकी घटना की पुनरावृति के बाद हमारे शासक उन्हीं घिसे-पिटे शब्दबाणों से प्रहार करते हैं,  जैसे यह भी रस्म अदायगी का एक आवश्यक उपक्रम भर रह गया है। जिस अमेरिका ने कभी मजहबी आतंकवाद को रूस के खिलाफ इस्तेमाल किया और इसे संरक्षण भी दिया था। वो खुद उसी आतंकवाद का शिकार हुआ। मजहब आधारित आतंकवाद के खिलाफ अभियान में अमेरिका को खरबों डॉलर झोंकना पड़ा। ओसामा बिन लादेन का सफाया करने में सफलता जरूर मिली, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ खरबों डॉलर झोंकने से एक खतरनाक स्थिति यह पैदा हुई , कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था लड़खड़ा गई। आज इस अमेरिकी गलती को आज सारा विश्व भुगत रहा है । भारत के लिए यह मामला कुछ ज्यादा ही महत्वपूर्ण हो जाता है । भारत से लगे देशों में आतंकवाद की फसल दिन दुनी – रात चौगुनी तरक्की कर रही है । सूचनाओ को इकठ्ठा करने की लम्बी चौड़ी कवायद के बाद भी हम हादसों को रोक नही पा रहे हैं ।

Friday, June 26, 2015

ख्याल आ गया !

बस यूँ ही चलते-चलते ......
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सोशल मीडिया ने अनजाने रिश्तों को पहचानने का एक मौका तो दिया है !
पर ....
जाने-पहचाने रिश्तों के दरमियाँ दूरियां कुछ बढ़ सी गई हैं !
जरा सोचिये ,
बस यूँ ही चलते-चलते ..................ख्याल आ गया !

बस यूँ ही

बस यूँ ही , चलते-चलते ......
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फेसबुक पर एक आईडी बनाइये , 
और लग जाइए किसी अर्थहीन बहस में ,
कुछ ही देर में आपका “मैं” ,
एक अदभुत श्रेष्ठता की अनुभूति पालेगा ! ! !
और बिना जानकारी के ही आपका नाम ,
जानकारों की फेरहिस्त में ,
आपकी अपनी ही ही नज़रों में दर्ज हो जाएगा !!!
बस यूँ ही चलते-चलते ..................ख्याल आ गया !

Wednesday, April 15, 2015

बयानबाजियों में उलझती सरकार

मुस्लिम समुदाय से वोट देने का अधिकार छीन लेने के शिवसेना नेता संजय राउत के बयान से उपजी सरगर्मियां ख़त्म होती नज़र नहीं आ रही । इस मुद्दे पर दोनों  पक्षों की बयानबाजियाँ और राजनीतिक दलों की खींचतान के साथ ही माहौल में गर्माहट पैदा हो गई । शायद बयान देने वालों का मकसद भी यही हालात पैदा करना था । इसी मकसद से यह बेतुका बयान आया था । हालांकि मुस्लिम समुदाय से वोट देने का अधिकार छीन लेने के शिवसेना नेता संजय राउत के बयान से सरकार और भाजपा ने किनारा कर लिया है । परन्तु इस बयान की निंदा करने का साहस भी सरकार नहीं दिखा सकी है। ऐसे में अल्पसंख्यक समुदाय में बयान के विरोध में स्वर उपजना स्वाभाविक है । मुस्लिम धर्मगुरुओं  ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि केंद्र में सत्तारुढ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के घटक दल शिवसेना के इस बयान पर नरेन्द्र मोदी सरकार को अपना रख साफ करना चाहिये। ऐसे माहौल में एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी भी कहाँ चुप रह सकते थे । ओवैसी ने भी मौके का फायदा उठाते हुए चौके लगाने की कोशिश शुरू कर दी ।
हमारे देश में मतदान का अधिकार संविधान के दायरे में आता है । परन्तु किसी भी महानुभाव ने संवैधानिक दायरे में इस बातचीत को परखने का दुस्साहस नहीं । भारत दुनिया का सबसे बडा लोकतंत्र है, जिसके बुनियादी उसूलों में धर्मनिरपेक्षता अपना अहम स्थान रखती है ।यह सही है कि राजनीतिक पार्टियां अब तक मुसलमानों को वोट बैंक की तरह सिर्फ इस्तेमाल करती रही हैं । साथ ही साथ यह सच्चाई भी किसी से छुपी नहीं है कि मुसलमानों को सिर्फ वायदे मिले हैं । विकास की तरफ उनके क़दमों को बढाने के लिए कोई भी सरकारी योजना और कार्यक्रम व्यावहारिक धरातल पर फिसड्डी ही साबित हुए है । अनगिनत कार्यक्रम सिर्फ घोषणाओं में ही नज़र आये ।  यकीनन यह हालात बदलने चाहिए । लेकिन मुस्लिमों से मताधिकार छीन लेना, इस समस्या का हल कतई नहीं है। देश के संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को संविधान के दायरे में ही हल ढूंढना चाहिए । असंवैधानिक भाषा और असंसदीय आचरण से देश जुड़ता नहीं , बिखरता है । लोगों में उन्माद भरने से मसले सुलझते नहीं , उलझते हैं । 

अब समय आ गया है कि देश के प्रधानमन्त्री को भी देश वासियों के बीच इस नफ़रत के बीज बोने वाले लोगो पर सख्त रवैय्ये के संकेत देने होंगे । विदेशों में आदर्श स्थितियों की परिकल्पना प्रस्तुत करने के साथ साथ देश में भी वैसी ही जमीन सच में तैयार भी करनी होगी । वरना सरकार के मुखिया होने के नाते प्रधानमन्त्री अपने ही सहयोगियों की इस बयान बाजियों के दाग से छुटकारा नहीं पा पाएंगे । दूसरी तरफ ओवैसी जैसे नेताओं को भी अपनी भाषा में वही संयम लाना होगा जिसकी अपेक्षा वह दूसरों से कर रहे हैं ।

Friday, February 27, 2015

आखिर सच क्या है ?

अरे भैया हम तनिक कनफ़्युसिया गए हैं ! बात कुछ हज़म नहीं हो रही  , आखिर होती भी कैसे ? आखिर विरोधाभासी तड़का जो लग गया था ! चलिए मान लेते हैं कि मनरेगा देश के लिए हितकारी नहीं है ! हम कुछ देर के लिए विश्व बैंक की मनरेगा के सकारात्मक पक्ष को उभारती रिपोर्ट को भी भूल जाते हैं ! लेकिन भाई अगर सर्वोच्च पद पर बैठ कर हमें  पता लग गया है कि मनरेगा देश के लिए ठीक नहीं है तो हम तत्काल प्रभाव से बंद क्यों नहीं कर देते ? आखिर हम सिर्फ कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराने की जिद में एक गलत योजना को को क्यों चलाना चाहते हैं ? यकीनन कांग्रेस से देश ज्यादा महत्वपूर्ण है ! ऐसे में क्यों हम देश हित को पीछे रख कर सिर्फ कांग्रेस की बलिहारी देश का इतना नुकसान करते रहने को विवश हैं ? शायद आप महानुभवों के पास जवाब हों ..... तनिक हमरा ज्ञानवर्धन भी कर दीजे !