कन्याकुमारी से
कश्मीर तक पूरे देश के लोगों की उम्मीद है विकास , सुशासन और रोजगार। यों तो नई सरकार के लिए छह महीने का कार्यकाल बहुत ज्यादा नहीं होता, लेकिन यह सरकार अन्य सरकारों की तरह
सामान्य नहीं है। इतने बड़े पैमाने पर युवाओं ने शायद ही किसी सरकार को वोट दिया हो।
परिवर्तन के लिए हमेशा तैयार रहने वाली यह पीढ़ी अपनी अपेक्षाओं पर सरकार को तौल
रही है । उसको विकास , सुशासन और रोजगार तो चाहिए ही है । पुराने
वायदों पर अमल भी चाहिए । जोकि बीजेपी के परंपरागत वोटर की भी प्राथमिकता होगी ।
ऐसे में सरकार के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं । लेकिन उनके पास यह सब करने के लिए
बहुमत से लबरेज़ एक लम्बा सुनिश्चित कार्यकाल भी है । देखना यह है कि लोगों की
“यू टर्न” से “राईट टर्न” तक की चाहत कब पूरी हो पाएगी । सच की तलाश में शुरू हुआ सफ़र.....मंजिल तक पहुंचेगा जरुर !!!
AMIR KHURSHEED MALIK
Friday, January 2, 2015
Wednesday, December 31, 2014
Monday, December 29, 2014
अलविदा 2014
अलविदा 2014 ..... कुछ अच्छी , कुछ बुरी यादों के साथ 2014 को अब विदाई देने का समय अब करीब आ गया हैं ! यकीनन सब अच्छा नहीं हुआ होगा ! इसी तरह सब बुरा भी नहीं हुआ होगा ! पर अच्छे को सहेज कर हमको आगे जारी रखना है ! बुरे के अनुभवों से सीख लेकर उनको भी अच्छे में बदलना है ! जिससे एक अच्छा देश और समाज बनाने में हमारी भूमिका प्रभावी हो सके ! कुछ सवाल उठ सकते हैं कि पुराने वर्ष की विदाई और नव वर्ष का स्वागत हमारे धार्मिक मान्यताओं और अपेक्षाओं से मेल नहीं खाता है ! लेकिन जिस अंग्रेजी कैलेंडर के इर्द गिर्द हमने अपने जीवन को बाँध रखा है , उसके अनुसार सिर्फ शुभकामनाएं करना कदापि अनुचित नहीं होगा ! अच्छे की कामना को किसी भी बहाने से कर लीजिये ...... अच्छा ही होगा !
हार्दिक शुभकामनाये
Thursday, December 25, 2014
““यू टर्न”
मोदी सरकार 6
महीने गुजरने के साथ ही ““यू टर्न” सरकार” का तमगा हासिल
करने में कामयाब रही है। बीमा विधेयक हो या बांग्लादेश के साथ सीमा समझौता , एफडीआई
में विदेशी निवेश बढाने की नीति हो या नेताजी सुभाषचंद्र बोस की फाइलों के सच को
छुपाने की चाहत । आज भाजपा की सरकार वही कर रही है जो संप्रग सरकार करना चाहती थी ।
कालाधन , एफडीआई , पाक का मुंहतोड़ जवाब ,जैसे कई मुद्दों पर बीजेपी का रुख बदला
हुआ नज़र आरहा है । यह
कहना गलत ना होगा कि आज भाजपा सरकार अपने परंपरागत वादों से मुकरती नज़र आ रही है । उधर अगर
दुसरे पहलू पर देखें तो आज कई मुद्दों पर कांग्रेस की वही राय है ,जो
विपक्ष में रहते हुए भाजपा बोलती थी । हालाँकि सरकार का दावा है कि उसने छह महीने
में बहुत कुछ कर दिया है । भाजपा को एक के बाद एक चुनावी कामयाबी भी मिल रही है, लेकिन हर चुनावी
कामयाबी के बाद उम्मीदों की संख्या भी बढती जा रही है। सिर्फ 6 माह में हर उम्मीद
तो परवान नही चढ़ सकती पर ऐसे में बीजेपी के पुराने वायदों पर सबकी नज़र जाना
स्वभाविक है ।
Tuesday, December 23, 2014
बलात्कार अर्थात सामाजिक बेशर्मी
बलात्कार के अधिकतर
मामलों में महिला का कोई करीबी या जानकार बलात्कार के मामले में शामिल होता है ।
जिससे घटना को होने से पहले रोक पाने में पुलिस की भूमिका कम प्रभावी हो पाती है ।
लेकिन अगर त्वरित कार्यवाही और सजा के उदाहरण सामने हों । तो घटनाओं पर लगाम लग
सकती है । दुखदाई पहलु यह है कि पीडिता को ही समाज भी तिरस्कार देता है । जिससे
आरोपियों के होसले बुलंद होते हैं । कोई घटना होने पर सामाजिक संघटनो का प्रतिरोध
सड़कों पर नज़र आता है ।उस वक़्त कार्यवाही के लम्बे चौड़े वायदे होते हैं । तत्पश्चात
व्यवस्था फिर उसी ढर्रे पर सवार नज़र आती है । क्या हमें बार-बार बलात्कार की घटना हो जाने के बाद प्रतिवावद
और आंदोलन की जरूरत है ? आखिर क्यों नहीं
एक सशक्त कानून और उसका पालन करता तंत्र सामने आता ? आखिर क्यों नहीं हमारा समाज पीडिता के पक्ष में
, और आरोपी के विरोध में मजबूती के साथ नज़र आता
है ? सामाजिक बेशर्मी और प्रशासनिक शिथिलता के कारण
इसके उत्तर लापता हैं।
Saturday, December 20, 2014
जुल्मों-सितम की दास्तान बदस्तूर जारी
दिल्ली में हुए “उबेर टैक्सी काण्ड” के बाद एक बार फिर देश
में महिलाओं पर अनवरत जारी जुल्मों-सितम पर बहस छिड गई है। आज महिलाएं जहां एक ओर
अपनी योग्यता, पराक्रम और उद्यमशीलता से रोज नए प्रतिमान बना रही हैं, वहीं महिलाएं का एक बड़ा
हिस्सा शोषण, अत्याचार और हिंसा का शिकार हैं।दिन-प्रतिदिन बढ़ते मामलों ने घर से बाहर निकल
कर बराबरी की चाह रख रही महिलाओं को दुबकने पर मजबूर कर दिया है । आज
बलात्कार,शारीरिक शोषण से आगे बढ़ कर बात हत्या तक पहुँच चुकी है । कई बार इन
घटनाओं के इतने वीभत्स रूप सामने आते हैं कि उनको शब्दों में बयान नहीं किया जा
सकता ।
हमारी कानून का पालन कराने तथा न्याय दिलाने की प्रणालियां, बहुत ही खस्ता हालत में हैं। यह बहुत ही जरूरी है कि महिलाओं के खिलाफ ऐस अमानवीय जुर्म करने वालों को जल्दी से जल्दी सजा दिलाने के लिए, विशेष अदालतें कायम की जाएं।अदालतों और जजों की कम संख्या न्याय प्रक्रिया को लम्बा और दुरूह कर देते हैं | हमारे देश में अपराध के लिए सजा दिए जाने का रिकार्ड इतना खराब होने के चलते ही, अपराधियों के मन में अब कानून का कोई डर ही नहीं रह गया है।आबादी और पुलिस का अनुपात, दुनिया भर में सबसे निचले स्तर पर है। जब तक कानून का पालन कराने वाले बलों की कतारों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी करने तथा उन्हें समुचित प्रशिक्षण मुहैया कराने के लिए कदम नहीं उठाए जाते हैं, हालात सुधारने वाले नहीं हैं । आप को जान कर हैरानी होगी कि 2011 में बलात्कार के दर्ज हुए मामलों में से पूरे 36 फीसदी से अधिक में तो कोई जांच भी अब तक पूरी नहीं हो पायी है। तो फिर 2011 के बाद के मामलों की क्या स्थिति होगी इसका अंदाज़ आप खुद लगा सकते हैं।
हमारी कानून का पालन कराने तथा न्याय दिलाने की प्रणालियां, बहुत ही खस्ता हालत में हैं। यह बहुत ही जरूरी है कि महिलाओं के खिलाफ ऐस अमानवीय जुर्म करने वालों को जल्दी से जल्दी सजा दिलाने के लिए, विशेष अदालतें कायम की जाएं।अदालतों और जजों की कम संख्या न्याय प्रक्रिया को लम्बा और दुरूह कर देते हैं | हमारे देश में अपराध के लिए सजा दिए जाने का रिकार्ड इतना खराब होने के चलते ही, अपराधियों के मन में अब कानून का कोई डर ही नहीं रह गया है।आबादी और पुलिस का अनुपात, दुनिया भर में सबसे निचले स्तर पर है। जब तक कानून का पालन कराने वाले बलों की कतारों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी करने तथा उन्हें समुचित प्रशिक्षण मुहैया कराने के लिए कदम नहीं उठाए जाते हैं, हालात सुधारने वाले नहीं हैं । आप को जान कर हैरानी होगी कि 2011 में बलात्कार के दर्ज हुए मामलों में से पूरे 36 फीसदी से अधिक में तो कोई जांच भी अब तक पूरी नहीं हो पायी है। तो फिर 2011 के बाद के मामलों की क्या स्थिति होगी इसका अंदाज़ आप खुद लगा सकते हैं।
Friday, December 19, 2014
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