सच की तलाश में शुरू हुआ सफ़र.....मंजिल तक पहुंचेगा जरुर !!!
AMIR KHURSHEED MALIK
Wednesday, May 27, 2015
Tuesday, May 26, 2015
Friday, May 22, 2015
Wednesday, May 13, 2015
Wednesday, April 15, 2015
बयानबाजियों में उलझती सरकार
मुस्लिम समुदाय से वोट देने का अधिकार छीन लेने के शिवसेना
नेता संजय राउत के बयान से उपजी सरगर्मियां ख़त्म होती नज़र नहीं आ रही । इस मुद्दे पर दोनों
पक्षों की बयानबाजियाँ और राजनीतिक दलों की खींचतान के साथ ही माहौल में गर्माहट
पैदा हो गई । शायद बयान देने वालों का मकसद भी यही हालात पैदा करना था । इसी मकसद
से यह बेतुका बयान आया था । हालांकि मुस्लिम समुदाय से वोट देने का अधिकार
छीन लेने के शिवसेना नेता संजय राउत के बयान से सरकार और भाजपा ने किनारा कर लिया
है । परन्तु इस बयान की निंदा करने का साहस भी सरकार नहीं दिखा सकी है। ऐसे में अल्पसंख्यक समुदाय में बयान के विरोध में स्वर
उपजना स्वाभाविक है । मुस्लिम
धर्मगुरुओं ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा
कि केंद्र में सत्तारुढ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के घटक दल शिवसेना के इस बयान
पर नरेन्द्र मोदी सरकार को अपना रख साफ करना चाहिये। ऐसे
माहौल में एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी भी कहाँ चुप रह सकते थे । ओवैसी ने भी
मौके का फायदा उठाते हुए चौके लगाने की कोशिश शुरू कर दी ।
हमारे देश में मतदान का अधिकार संविधान के दायरे में आता है । परन्तु किसी भी
महानुभाव ने संवैधानिक दायरे में इस बातचीत को परखने का दुस्साहस नहीं । भारत दुनिया का सबसे बडा लोकतंत्र है, जिसके बुनियादी उसूलों में धर्मनिरपेक्षता अपना
अहम स्थान रखती है ।यह सही है
कि राजनीतिक पार्टियां अब तक मुसलमानों को वोट बैंक की तरह सिर्फ इस्तेमाल करती
रही हैं । साथ
ही साथ यह सच्चाई भी किसी से छुपी नहीं है कि मुसलमानों को सिर्फ वायदे मिले हैं ।
विकास की तरफ उनके क़दमों को बढाने के लिए कोई भी सरकारी योजना और कार्यक्रम
व्यावहारिक धरातल पर फिसड्डी ही साबित हुए है । अनगिनत कार्यक्रम सिर्फ घोषणाओं
में ही नज़र आये । यकीनन यह हालात बदलने
चाहिए । लेकिन
मुस्लिमों से मताधिकार छीन लेना, इस समस्या का हल कतई नहीं है। देश के संवैधानिक पदों पर
बैठे लोगों को संविधान के दायरे में ही हल ढूंढना चाहिए । असंवैधानिक भाषा और
असंसदीय आचरण से देश जुड़ता नहीं , बिखरता है । लोगों में उन्माद भरने से मसले
सुलझते नहीं , उलझते हैं ।
अब समय आ गया है कि देश के प्रधानमन्त्री को भी देश वासियों
के बीच इस नफ़रत के बीज बोने वाले लोगो पर सख्त रवैय्ये के संकेत देने होंगे ।
विदेशों में आदर्श स्थितियों की परिकल्पना प्रस्तुत करने के साथ साथ देश में भी
वैसी ही जमीन सच में तैयार भी करनी होगी । वरना सरकार के मुखिया होने के नाते
प्रधानमन्त्री अपने ही सहयोगियों की इस बयान बाजियों के दाग से छुटकारा नहीं पा
पाएंगे । दूसरी तरफ ओवैसी जैसे नेताओं को भी अपनी भाषा में वही संयम लाना होगा
जिसकी अपेक्षा वह दूसरों से कर रहे हैं ।
Saturday, April 4, 2015
उर्दू कहानी के सशक्त हस्ताक्षर : खुर्शीद मलिक
आज उनको हमसे बिछड़े हुए 12 साल हो गए । यकीनन वक़्त हर जख्म पर मरहम रख देता है । पर कुछ कमियां कभी पूरी नहीं हो सकती । 04 अप्रैल 2003 को हमारे वालिद और उर्दू अफसानानिगार जनाब “खुर्शीद अहमद मलिक” हम सब को अकेला छोड़ कर दुनिया को अलविदा कह गए थे । इस्लामियां इंटर कॉलेज में अंग्रेजी के प्रवक्ता के पद पर कार्यरत रहते हुए भी उर्दू अदब से उनका लगाव बेमिसाल था । उनके अनगिनत उर्दू अफ़साने देश-विदेश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए । उनके कहानी संग्रह “सिमटी हुई किरचें” और “रिश्तों का बोझ” को काफी पसंद किया गया था । इनको कई पुरस्कार भी प्राप्त हुए थे । इसके अलावा उनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हुईं ।“जहान –ए-अफसाना” सहित कई कहानी संग्रहों का उन्होंने सम्पादन किया । रूसी कहानियों के उर्दू में अनुवाद के लिए उन्हें काफी प्रशंसा मिली । प्रसिद्ध उर्दू लेखक “रामलाल” के साहित्यिक पत्रों पर विशिष्ठ लेखन के लिए उर्दू साहित्य जगत में उन्हें काफी सराहा गया । इसको एक पुस्तक के रूप में भारत के साथ पाकिस्तान में भी प्रकाशित होने का मौका मिला । कई बड़े अंग्रेजी के लेखकों की रचनाओं को उर्दू और हिंदी के पाठकों तक पहुचाने के लिए उनका अनुवाद का काम पूरे जीवन चलता रहा ।बेडमिन्टन के अच्छे खिलाड़ी मोहतरम “खुर्शीद अहमद मलिक” साहब के वालिद “आस मोहम्मद मलिक” इस्लामियां इंटर कॉलेज में प्रिंसिपल थे । अंग्रेजी के अध्यापक,उर्दू और हिंदी के लेखक “खुर्शीद अहमद मलिक” साहब ने हाई स्कूल के लिए गणित विषय की पाठ्य पुस्तक भी लिखी थी । जिसको उस समय कई विद्यालयों में काफी सराहना भी मिली थी । “खुर्शीद अहमद मलिक” साहब की पत्नी “शमा अज़ीज़” नेशनल गर्ल्स इंटर कॉलेज में होम साइंस की लेक्चरार रही हैं । “खुर्शीद अहमद मलिक” के कई कहानी संग्रहों के आवरण पृष्ठ के चित्र उनकी ही कला का नमूना होते थे । उनकी दो बहने डा. सुरैय्या मलिक और डा. शहनाज़ मलिक हैं । जो कानपुर में रहती हैं ।तीन बेटे:-ई० आमिर मलिक,डा.कादिर मलिक,डा.यासिर मलिक हैं ।
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