बलात्कार के अधिकतर मामलों में महिला का कोई करीबी या जानकार बलात्कार के मामले में शामिल होता है । जिससे घटना को होने से पहले रोक पाने में पुलिस की भूमिका कम प्रभावी हो पाती है । लेकिन अगर त्वरित कार्यवाही और सजा के उदाहरण सामने हों । तो घटनाओं पर लगाम लग सकती है । दुखदाई पहलु यह है कि पीडिता को ही समाज भी तिरस्कार देता है । जिससे आरोपियों के होसले बुलंद होते हैं । कोई घटना होने पर सामाजिक संघटनो का प्रतिरोध सड़कों पर नज़र आता है ।उस वक़्त कार्यवाही के लम्बे चौड़े वायदे होते हैं । तत्पश्चात व्यवस्था फिर उसी ढर्रे पर सवार नज़र आती है । क्या हमें बार-बार बलात्कार की घटना हो जाने के बाद प्रतिवावद और आंदोलन की जरूरत है ? आखिर क्यों नहीं एक सशक्त कानून और उसका पालन करता तंत्र सामने आता ? आखिर क्यों नहीं हमारा समाज पीडिता के पक्ष में , और आरोपी के विरोध में मजबूती के साथ नज़र आता है ?
सच की तलाश में शुरू हुआ सफ़र.....मंजिल तक पहुंचेगा जरुर !!!
AMIR KHURSHEED MALIK
Thursday, July 24, 2014
Wednesday, March 19, 2014
अवसरवादिता का जायका
राजनीति में सिद्धांत और विचार काफी पीछे छूट गए हैं , अवसरवादिता का
भरपूर जायका चख चुकी राजनीति आज अपने निम्नतर स्तर पर है ! सत्ता की ललक में
कल-आज-कल के चेहरे कई रंग बदल चुके हैं !
अमेरिकी प्रमाणपत्र
अमेरिका ने हमारे देशी-विदेशी हितो पर हमेशा से कुठाराघात
ही किया है ! शायद यह हमारे रूस के साथ रहे तत्कालीन संबंधो का असर है , या कुछ और, मै नहीं जानता !
अगर अन्तराष्ट्रीय स्तर पर देखे तब भी अमेरिका ने हमेशा मानवीय पहलुओं को दरकिनार
किया ! दूसरी तरफ पर भारतीय राजनीति आज भी अपने आचरण के प्रमाणपत्र के लिए अमेरिका
की और मुंह ताकती दिखाई पड़ती हैं , तो यकीनन अफ़सोस होता है !
Tuesday, March 18, 2014
महिला सशक्तिकरण
देश के वोटरों की आधी आबादी का दम भरने वाली महिला शक्ति का संसद और विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व मात्र नौ प्रतिशत ही है ।यह आंकड़े विभिन्न दलों के महिला सशक्तिकरण के किये जा रहे बड़े-बड़े दावों की पोल खोलते हैं ।4896 सांसदों और विधायकों में महिला प्रतिनिधियों की संख्या मात्र 418 है जो केवल नौ फीसदी है। भारत निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, सांसदों की श्रेणी में 15वीं लोकसभा के 543 सदस्यों में 59 महिला सदस्य (11 फीसदी) और राज्यसभा में दस फीसदी यानी 23 महिला सदस्य हैं।
Friday, March 14, 2014
उत्तर प्रदेश आज खुद नेतृत्व विहीन
देश की राजनीति को नेतृत्व देने वाला उत्तर
प्रदेश आज खुद नेतृत्व विहीन है। भाजपा ने जहाँ गुजरात के मंत्री
अमित शाह को प्रदेश प्रभारी बना कर संगठन में जान फूंकने की कवायद की है । वहीँ, कांग्रेस ने शाह का
जवाब देने के लिए राहुल गाँधी के करीबी और संगठन के काम में माहिर साबरकांठा से सांसद
मधुसुदन मिस्त्री को उत्तर प्रदेश भेजा। शाह और मिस्त्री उत्तर
प्रदेश की राजनीति की उस नब्ज को पकड़ेंगे जिसको समझने के लिये जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गाँधी, अटल विहारी वाजपेई
ने अपना पूरा जीवन लगा दिया। समय बदला देश की राजनीति बदली आज हालत ये है की देश को
नेतृत्व देने वाले उत्तर प्रदेश में अपना आस्तित्व तलाश रही राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टिया
आज उत्तर प्रदेश में नेतृत्व विहीन है।
Monday, March 3, 2014
स्वतंत्रता
स्वतंत्रता के लिए अपना तन -- मन -- धन कुर्बान कर देने वाले राष्ट्रभक्तो की इस देश में घनघोर उपेक्षा की जाती रही है | बहुतेरे नामी गिरामी राष्ट्रभक्तो शहीदों का तो लोग नाम तक नही जानते | इनकी जगह धन -- सत्ता , पद -- प्रतिष्ठा पर चढ़ रहे ऐसे लोग अब इस राष्ट्र के नायक बनते जा रहे है , जिन्होंने खोया तो कुछ नही है और पाया सब कुछ है |
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