सच की तलाश में शुरू हुआ सफ़र.....मंजिल तक पहुंचेगा जरुर !!!

सच की तलाश में शुरू हुआ सफ़र.....मंजिल तक पहुंचेगा जरुर !!!
AMIR KHURSHEED MALIK
Showing posts with label KHURSHEED. Show all posts
Showing posts with label KHURSHEED. Show all posts

Friday, February 27, 2015

भ्रूण हत्या - एक सामाजिक अपराध

भारत को अपनी अजन्मी बेटियों के भ्रूण हत्या के असामाजिक कृत्य को अपने सामाजिक दायरे से जुदा ना कर पाने का दंश लगातार बर्दाश्त करना पड रहा है। हर साल ऐसी 6 लाख बच्चियां जन्म नहीं ले पातीं जिन्हें देश के औसत लिंग अनुपात के हिसाब से दुनिया में आना था। देश में पुरूष-महिला लिंगानुपात के बीच की खाई लगातार बढ़ती ही जा रही है। विश्व स्तर पर हुए एक हालिया अध्ययन के मुताबिक आज हमारे देश में एक हजार पुरुष की तुलना में महिलाओं की संख्या 940 रह गई है। यह अंतर दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। लड़कियों की घटती संख्या और शिक्षा तथा रोज़गार के क्षेत्र में उनकी बढती सहभागिता के बावज़ूद हमारे सामाजिक ढांचे में लड़कियों और स्त्रियों की हैसियत में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं आ पाया है । जिस देश में नारी रूप में अनेक देवीयों की पूजा अर्चना की जाती है। उस देश में बेटीयों को अपने अस्तित्व के लिए संर्घष करना पङ रहा है। बेटा वंश परंपरा को आगे बढ़ाता है, बेटा मां-बाप के साथ रहकर बुढ़ापे का सहारा बनता है ,जैसी दलीलें पुरुष प्रधान समाज ने विकसित की । वही सामाजिक ताने बाने ने लड़कियों के लिए भरण पोषण, दहेज़ के साथ साथ शारीरिक सुरक्षा की भी चिंता पैदा कर दी । इन्ही सब के मध्य बालक-बालिका के बीच पनपता भेदभाव लोगों के मन से निकल कर आंकड़ों के भयावाह स्वरुप में हमारे सामने आ खड़ा हुआ है ।