सच की तलाश में शुरू हुआ सफ़र.....मंजिल तक पहुंचेगा जरुर !!!

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AMIR KHURSHEED MALIK

Wednesday, January 28, 2015

राष्ट्रीय पर्व बनाम सरकारी छुट्टी

उल्लास और उमंग से भरा एक और गणतंत्र दिवस का हमारे सामने से गुज़र गया । यक़ीनन यह गर्व् करने लायक पल होते हैं । आखिर इसी दिन दुनिया के सबसे लोकतंत्र नें अपने संविधान को अमलीजामा पहनाया था । लेकिन इससे हटकर भी कुछ कड़वी सच्चाइयाँ हैं । हम हिन्दुस्तानियों का एक बड़ा हिस्सा अपने राष्ट्रीय पर्वों को सरकारी छुट्टी से ज्यादा नहीं समझता । हम सबका जो जुड़ाव और उत्साह अपने राष्ट्रीय पर्वों के लिए होना चाहिए , नदारद दिखता है । यह कोई अच्छी स्थिति हरगिज़ नहीं है । अगर हम ईद,होली,दीवाली की ख़ुशी मना सकते है , तो राष्ट्रीय पर्व क्यों अनछुये रह जाते हैं । अपनी गली-मौहल्ले में हम कयों नहीं बधाईयाँ देते नज़र आते ? क्यों हमारी सक्रियता सिर्फ सोशल मीडिया पर ही नज़र आती है ? आखिर हमारी देशभक्ति किसी क्रिकेट मैच की मोहताज़ क्यों रहती है ? ऐसे अनगिनत सवाल मुझे परेशान करते हैं । क्या आपको लगता है कि कभी इन सवालों के जवाब ढूंढें जा सकेंगे ?

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