बाल साहित्यकारों का जब
ज़िक्र होता है तो ऐसा संभव ही नहीं है कि डा. नागेश पांडेय 'संजय' का नाम जहन में ना आये ! शाहजहांपुर का यह
रचनाकार देश की सभी प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओं में
बच्चों के लिए कहानी , कविता , एकांकी , पहेलियाँ और यात्रावृत्त से अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा चूका है ! बच्चों के मन की कोमलता और जिज्ञासाओं के बीच
अदभुत सामंजस्य बिठाते हुए प्रेरक सन्देश दे जाने के गुण को बखूबी जानने वाले डा. नागेश पांडेय 'संजय' सरल स्वभाव के
मालिक हैं ! उनका जन्म ०२
जुलाई १९७४ को खुटार ,शाहजहांपुर में हुआ था ! माता श्रीमती
निर्मला पांडेय एवं पिता श्री बाबूराम पांडेय के संस्कार और शिक्षा की बदौलत उन्होंने
सही और गलत के अंतर को बचपन में ही पहचान लिया ! यही वजह है कि उनकी बाल्यकाल की रचनाओं में भी एक संस्कारिक
सन्देश छुपा होता था ! जिसको व्यक्तिगत
रूप से स्वयं मैंने भी महसूस किया है ! क्योंकि उनके
रचना संसार के उस आधार स्तम्भ के निर्माण के दौरान मैंने उनके साथ बहुत सारी आत्मीय
चर्चाओं के मध्य एक परिपक्व बाल साहित्यकार को उभरते देखा है !
राजेंद्र प्रसाद पी. जी. कालेज , मीरगंज, बरेली में प्राध्यापक एवं विभागाद्यक्ष , (बी. एड.) डा. नागेश नें बाल साहित्य के अतिरिक्त बड़ों के लिए भी गीत एवं कविताओं का सृजन किया है ! उनके बाल कहानी संग्रह “नेहा ने माफ़ी मांगी” , “आधुनिक बाल कहानियां” , “अमरुद खट्टे हैं” , “मोती झरे टप- टप” , “अपमान का बदला” , “भाग गए चूहे” ,. “दीदी का निर्णय” , “मुझे कुछ नहीं चहिये” एवं “यस सर नो सर” बच्चों के लिए उनकी अनमोल सौगात है ! उनके बाल कविता संग्रह “चल मेरे घोड़े” ,. “अपलम चपलम” , “लारी लप्पा” एवं “यदि ऐसा हो जाए “ बच्चों को गुनगुनाने के साथ –साथ सीख देने का भरपूर खजाना समेटे हुए हैं ! उनकी रचनाओं के अंग्रेजी, पंजाबी , गुजराती , सिंधी , मराठी , नेपाली , कन्नड़ , उर्दू , उड़िया आदि अनेक भाषाओं में अनुवाद हो चुके हैं ! अनेक रचनाएँ दूरदर्शन तथा आकाशवाणी के नई दिल्ली , लखनऊ , रामपुर केन्द्रों से प्रसारित हो चुकी हैं ! डा. नागेश नें आलोचना ग्रन्थ “बाल साहित्य के प्रतिमान” ,”बाल साहित्य : सृजन और समीक्षा” एवं कविता संग्रह : “तुम्हारे लिए” से अपनी पैनी द्रष्टि का परिचय भी हम सबको दिया है ! इसके अतिरिक्त बाल पहेलियाँ : “जो बूझे वह चतुर सुजान”,बाल एकांकी संग्रह : “छोटे मास्टर जी’, सम्पादित संकलन. “न्यारे गीत हमारे” , “किशोरों की श्रेष्ठ कहानियां” , “बालिकाओं की श्रेष्ठ कहानियां” , “इन्द्रधनुषी बाल कहानियाँ” से भी उनके उनके बहुआयामी तेवरों से हम सब रूबरू हो चुके हैं ! उनको कई पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं ! उनके उज्जवल भविष्य हेतु हार्दिक शुभकामनाएं !

नागेशजी के उज्ज्वल भविष्य हेतु हार्दिक शुभकामनाएँ!
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