सच की तलाश में शुरू हुआ सफ़र.....मंजिल तक पहुंचेगा जरुर !!!

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AMIR KHURSHEED MALIK
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Monday, March 16, 2015

विपरीत ध्रुवों के मिलन की गर्माहट

शपथ लेते ही मुख्यमंत्री मुफ्ती मो. सईद का विवादास्पद बयान, फिर पीडीपी विधायकों द्वारा अफजल गुरू के अवशेष उसके परिवारजनों को सौंपे जाने की मांग और उसके बाद पांच साल से जेल में बंद अलगाववादी मसरत आलम की एकाएक रिहाई ने न सिर्फ इस राज्य बल्कि समूचे देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। एक गठबंधन सरकार के लिए इससे ज्यादा बुरी शुरुआत और क्या हो सकती है? इसके लिए यकीनन गठबंधन के दोनों घटक ही ज़िम्मेदार माने जाएंगे।इस मुद्दे पर पैदा हुई गर्माहट से भूमि अधिग्रहण क़ानून सहित अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे बहुत पीछे रह गए ।चौराहों से लेकर संसद तक यही मुद्दा गर्माहट पाता रहा ।
उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव के मिलन जैसी परिकल्पना ही जम्मू और कश्मीर की नई सरकार के गठन के साथ ही आंकी जा रही थी । यह तो सबको लग रहा था कि विपरीत विचारधारा का यह गठबंधन बहुत लम्बा समय शायद नहीं पा पायेगा । मुफ्ती इस असलियत को जानते हैं। भाजपा के रणनीतिकार भी इस असलियत से अनजान नहीं हैं । दोनों ही पक्ष सत्ता का लाभ उठाकर अपनी राजनीतिक स्थिति इतनी मजबूत कर लेना चाहते हैं जिससे मध्यावधि चुनाव होने की स्थिति में वे स्थायित्व के नाम पर स्पष्ट बहुमत हासिल कर सकें। जहाँ पीडीपी घाटी के वोटर पर निगाह गडाए है । इधर भाजपा की सोच भी जम्मू क्षेत्र में और अधिक सफलता के साथ सत्ता के कण्ट्रोल तक जाना है ।लेकिन बदलते घटनाक्रम में भाजपा को कई सवालों के घेरे में आना पड रहा है , जिनके जवाब उसके लिए सहज नहीं होंगे । पार्टी ने पहले तो अपने मूल मुद्दे धारा 370 को समझौते के नाम पर कुर्बान किया । अब मुफ्ती के बयानों एवं निर्णयों का विरोध होने से कश्मीर में पीडीपी का जनाधार तो मजबूत होता जा रहा है , परन्तु भाजपा पूरे देश में साख गंवा रही है।दुखद यह है कि तात्कालिक राजनीतिक लाभ के लिए कश्मीर जैसे जटिल मसले पर राष्ट्रीय सरोकार के दूरगामी और बड़े मक़सद हाशिए पर डाले जा रहे हैं ।
मीडिया ने जिस तरह इस मुद्दे को क़ानून-न्याय-व्यवस्था की बजाय राष्ट्रवाद के आईने में देखा , उससे भाजपा अपने को नुकसान में पाने लगी है । मुफ़्ती पर आरोप लग रहे हैं , पर वो अपनी चिर परिचित  हीलिंग-टच पॉलिसीको आगे बढाने पर दृढ़ नज़र आ रहे है ।अब भाजपा को ही तय करना है कि उनका विरोध सिर्फ बयानों तक ही है , या वो इसको कोई अमली जामा पहनाने की हिम्मत भी जुटा पायेंगे ?