माननीय’ तो चले गए । लेकिन “चाय” से लेकर “वाय” तक हर जगह “किंगफिशर” का ही ज़िक्र जारी है । वैसे अगर आपको ‘माननीय’ का भी पक्ष जानना है , तो ट्विटर की शरण में जाना होगा । क्योंकि आप जानते ही हैं कि विशिष्ठजनों की भड़ास या सफाई के लिए वही उचित मंच है । आखिर देश की अदालत या कानून को अपने बारे में जानकारी देना अपनी ही शान में गुस्ताखी जैसा होता है । माननीय देश की सर्वोच्च लोकतान्त्रिक संस्था का सदस्य बनते समय अपने को बिना “क़र्ज़” और बिना “संपत्ति” का घोषित कर सकते हैं , तब वो कुछ भी कर सकते हैं । तब सरकार ने उनको ‘गरीबी रेखा से नीचे वाला राशन कार्ड’ प्रदान क्यों नहीं किया ? यह भी जांच का विषय होना चाहिए । अगर तब यह “बीपीएल कार्ड” उनको दे दिया जाता , तब शायद यह गरीब माननीय देश छोड़ कर भागने को विवश नहीं होता । जय हो !
सच की तलाश में शुरू हुआ सफ़र.....मंजिल तक पहुंचेगा जरुर !!!
AMIR KHURSHEED MALIK
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Saturday, March 12, 2016
Friday, July 31, 2015
'अच्छे दिन'
'अच्छे दिन' के वायदे के साथ सत्ता में आए मोदी ने कहा है कि आम लोगों के लिए 'बुरे दिन गए' और बुरा करने वालों के और 'बुरे दिन आएंगे'। उन्हें ध्यान रखना होगा कि पिछली सरकार की नाकामियों
पर एक हद तक ही बात की जा सकती है, अंततः जनता उनकी सरकार के कामकाज को ही कसौटी पर कसेगी।बयानों को पूरे पांच साल
की उपलब्धि नहीं बनाया जासकता । अभी भी चार साल बाकी हैं ।जिसमें करने को मोदी
सरकार के पास काफी कुछ है ।लोगों ने संसद की सीढ़ियों पर आँसुओं को छलकते देखा। देश
का सबसे ताक़तवर नागरिक सड़क पर झाड़ू लेकर निकल सकता है ।देखा कि कैसे मंत्रियों की
क्लास लगाई जा रही है।इन सब बातों का असर देश में तो गया है ।लेकिन अंतिम निर्णय
तो देश के सामूहिक विकास की निष्पक्ष परिभाषा ही तय करेगी ।
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